Wednesday, 12 August 2015

गांधीजी का ट्रस्टीशिप सिद्धांत

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'गांधीजी का ट्रस्टीशिप सिद्धांत' पर ‘म.गां.अ.हिं.वि.वर्धा’ में हुआ समूह अध्ययन चर्चा
गांधी विचार मंच द्वारा चलाये जा रहे 'समूह अध्ययन चर्चा श्रृंखला' के दूसरे सप्ताह के विषय 'गांधीजी का ट्रस्टीशिप सिद्धांत' पर व्यापक चर्चा में गांधीवाद के चार प्रमुख आयाम : सत्य, अहिंसा, स्वावलंबन और न्यासिता  में न्यासिता (ट्रस्टीशिप) का सिद्धांत आज भी प्रासंगिक और क्रांतिकारी  आर्थिक सिद्धांत है। जो पूँजीवाद और मार्क्सवाद के बीच का प्रकृति संमत रास्ता है। इस सिद्धांत के आधार पर विश्व शांति,  न्याय और आर्थिक समानता के लक्ष्य को हासिल किया जा सकता है।
चर्चा में दो प्रमुख बातें उभर कर सामने आई, एक तो पूँजीवाद के कारण बेरोजगारी दुनिया-भर में बढ़ी है और श्रम की महत्ता कम हुई है. वहीं दूसरी ओर बेरोजगारी ने समाज की सबसे छोटी इकाई परिवार को कमजोर किया है जिसने घरेलू हिंसा के साथ-साथ पति-पत्नी के रिश्ते को बड़े पैमाने पर तोड़ने का काम  किया. जबकि ट्रस्टीशिप सिद्धांत में इन सरे समस्या का समाधान है, इस बात को समझते हुए डॉ राममनोहर लोहिया ने इसे कानून का रूप देनें का कोशिश तो किया पर सफल नहीं हो पाये. उसके बाद पूर्व सांसद डॉ रामजी सिंह ने भी प्रयास किया लेकिन यहाँ भी सफलता नहीं मिली.

गांधीजी के शब्दों में ट्रस्टीशिप क्या है...ऊँच-नीच का समतलीकरण आर्थिक समानता अहिंसक स्वाधीनता की सर्वकुंजी (Master Key) है। आर्थिक समानता के लिए कार्य करने का मतलब है पूंजी और श्रम के अंतहीन संघर्ष का उन्मूलन। इसका अर्थ है, एक ओर तो उन मुट्ठी भर धनवानों के स्तर को नीचे लाना जिनके हाथ में राष्ट्र की अधिकांश संपदा केन्द्रित है और दूसरी ओर, आधा पेट भोजन पर जीवन-निर्वाह करने वाले लाखों-करोड़ों लोगों के स्तर को ऊपर उठाना। जब तक धनवानों और लाखों-करोड़ों भूखे लोगों के बीच की खाई  नहीं पटती तब तक अहिंसक किस्म की सरकार की स्थापना करना नितांत असंभव है। नई दिल्ली के आलीशान भवनों और उनके पास ही मजदूरों की टूटी-फूटी झोपड़ियों का अंतर स्वतंत्र भारत में एक दिन भी नहीं चल सकता, जिसमें देश के गरीब लोगों के हाथों में उतनी ही शक्ति होगी जितनी कि सर्वाधिक धनी लोगों के हाथों में। अगर धनवानों ने अपनी धन-दौलत और उससे प्राप्त शक्ति का स्वेच्छा से त्याग न किया और आम जनता को उसके हित के लिए उसमें साझीदार न बनाया तो निश्चित रूप से एक दिन हिंसक और रक्तरंजित क्रांति हो जाएगी।
मैं अपने न्यासिता के सिद्धांत पर दृढ़ हूँ, भले ही लोगों ने इसकी जमकर खिल्ली उड़ाई हो। यह सही है कि इसे प्राप्त करना कठिन है।

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